एक मार्ग के भटके सब राही
लिखीं कांटो की स्याही में
सफर मंजिल की होड़ में
सुकून कहां इस वादी में
तु है किस एकाकी में....! !
हौसले और हिम्मत जहां होती एक है
शिखर विजय का वहां एक है
बंदिशे - रंजिशे तोड़ जहां जीत आई है
दुख के बाद सुख की लहर आई है
निराशा है कहां मन की उस झांकी में
तु है किस एकाकी में....! !
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