हजार मिल जाएंगे
शुक्रवार, २ ओक्टोबर २०२०
एक मांगो हजार मिल जाएंगे
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Poem: 59299867 - हजार मिल जाएंगे.. Hajar Member: M Asim Nehal Comment: Wah wah bahut khoob जब थक हार कर बैठ गया तब यादों का पिटारा खोला देख दांग रह गया माला में जड़ी चमकदार मोतियों सी वक़्त के घुंघरुओं पे थिरकती, नृत्य में मग्न M.Asim Nehal
Wah wah bahut khoob जब थक हार कर बैठ गया तब यादों का पिटारा खोला देख दांग रह गया माला में जड़ी चमकदार मोतियों सी वक़्त के घुंघरुओं पे थिरकती, नृत्य में मग्न M.Asim Nehal
में देखता रहता हु सुन्दर सपना कोई तो कहे मुजे अपना। डॉ. जाडीआ हसमुख
anass lakehal 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m