एक मौत ऐसी चाहिए
चेहरे पर मुस्कुराहट
मूँछों पर वही पुराना ताव
और आँखों में आख़िरी पल तक चमक हो
न कोई शिकवा हो
न किसी से कोई गिला
किस्मत ने भले कुछ न दिया हो
पर मैंने अपनी तरफ़ से कभी कुछ कम न किया
जो कर सकता था सब किया
जहाँ खड़ा होना था वहाँ खड़ा रहा
जिसे अपना समझा उसके लिए
अपने हिस्से से भी ज़्यादा किया
न किसी ने मुझे समझा
न कोई मेरे साथ चला
जिसे दिल से चाहा वही हाथों से फिसलता चला गया
नसीब में शायद कुछ और ही लिखा था
मगर मैंने हर पन्ना अपनी तरफ़ से पूरा लिखा
हार तो बहुत बार मिली
मगर झुकना कभी सीखा नहीं
दिल टूटा तो टूटा
पर चेहरे की मुस्कान कभी फीकी नहीं
अब आख़िरी वक़्त जब आए
तो कोई अफ़सोस बाकी न हो
बस इतना सुकून हो कि
किस्मत से जो नहीं मिला
उसे पाने में मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी
और जब दुनिया मुझे आख़िरी बार देखे
तो बस इतना कहे
बंदा खाली हाथ आया था
खाली हाथ चला गया
पर अपनी तरफ़ से
ज़िंदगी पूरी जी गया
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