आज फिर से वो समय याद आगया जिसने मेरी जिंदगी बदल के रख दी।
मैं क्या था क्या बन गया।
पहले मैं डरता था बोलने से,
अब डरता हूँ ज्यादा न बोल जाऊ।
पहले मैं मुस्कुराता कम था पर अब सिर्फ मुश्कुराहट ही रह गयी हैं।
पहले मैं सिर्फ सपनो के पीछे भागता था अब सिर्फ समय को पीछे कर रहा हूं।
पहले सबके बारे में सोचता था अब अपने बारे में सोचने से पहले सौ बार सोचता हूं।
पहले बोलने से पहले सौ बार सोचता था अब बोलने के बाद सोचता हूं।
पहले हारने से डरता था अब हारा हुआ ही हु।
पहले लोगो की भावनाएं की कद्र करता था अब किसी की भावनाओं के बारे में सोचता भी नही।
पहले में इंसान था अब पता नही क्या हु मुझे खुद को नही पता।
उस वक़्त की बहुत याद आती है।
जब मैं भी इस रेस का हिस्सा था।
जब मैं अच्छा इंसान था।
जब मुझे मेरा वक़्त भी कीमती लगता था।
उस वक़्त की बहुत याद आती है।
Seems good start with a nice poem, Harsh. You may like to read my poem, Love And Iust. Thank you.
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A nice write... Keep it up... Read my poem In the mid of the night depression you are killing me too... Naila