(मंच संकरा और अँधेरा है, जैसे कोई लंबा गलियारा। सबसे आख़िर में एक ठोस दीवार। वक्ता उसी के सामने खड़ा है—साँसें भारी, कपड़ों पर लंबी यात्रा की धूल जमी हुई। ऊपर एक अकेली रोशनी टिमटिमा रही है।)
तो—
यहीं आकर रास्ता ख़त्म हो जाता है।
न कोई चेतावनी।
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