राम ही जाने, राम की माया Poem by Indra Mishra

राम ही जाने, राम की माया

राम ही जाने, राम की माया
भव में फसा कोई जान न पाया

राम निहारूँ, राम को जियुॅं
राम नाम अमृत नित पियुॅं

राम ओम है, राम ही सोम
राम वैद्य है, राम ही डोम

राम विपक्षी, राम सहोदर
राम गजानन, राम गजोदर

राम अकर्मय है, राम ही कर्म
राम अधर्म है, राम ही धर्म

राम हवा में, राम गगन है
राम नीर भू, राम अगन है

राम राम में राम रचे है
राम जगत में बस राम बसे है

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