जो हैं वो शिव हैं
जो नहींवो शिव हैं
तुममे शिव हैं, मुझमे शिव हैं
देखो खुद में झांक कर हम सबमे शिव हैं
शिव अनादी है शिव का न आरंभ है और न ही अंत
शिव तीनो लोको के स्वामी हैं
सृष्टी वो हैं जगत वो हैं, पृथ्वी वो हैं आकाश वो हैं
अंबर वो हैं गगन वो हैं, देखो तो पूरा ब्रम्भांड वो हैं
हे नीलकंठ हे त्रिपुरारी हे महाकालेश्वर हे गंगाधर हे चंद्रशेखर हे शिव हे शंकर हे शम्भू हे अदियोगी हे महादेव
मैं तीनो लोको के स्वामी के चरणों को नमन करता हु
तुमने जो ये जन्म दिया उसका मैं आभारी हूँ
तुमसे आया हु तुममे मिल जाऊ येही अभिलाषा है
बस तुमपर ही भरोशा है तुम ही मेरे आपने हो
ये सारा जग झूठा है ये सब मोह माया है
मुझे दर क्या होगा किसी का जब सर में महाकाल का साया है
हे भोले भंडारी मैंखुद को आपको समर्पित करता हु कृपा कर मेरे जीवन को धर्म के मार्ग पर चलने का राह दिखाए
खुद को आपसे मिलाने का उपाय बताये
जय भोले नाथ, जय शिव शम्भू
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Om Namah Shivay Jai Mahakal Tene Lokon Ke Swami, Kalaspati ki is kavita ki paribha hi sab vyakt krti hai... bahut acche namaskar