लड़कियों का संघर्ष Poem by Journalist sonam Saini

लड़कियों का संघर्ष

मैं फूल सी कली ख्वाबों से भरी,
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी
जिंदगी की तलाश में बस अकेली चली
कल कल राहों में दर - दर सी भटकी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी।

मैं फूल सी कली ख्वाबों से भरी,
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी
चेहरे पर मासूम सी खिलखिलाती हंसी
डाली डाली पर लगी जैसे फूलझड़ी
ख्वाहिशों से भरी मुश्किल रास्तों पर खड़ी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी।।

मैं फूल सी कली ख्वाबों से भरी,
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी
लाखों सपने लिए पग पग चली
सबके साथ लाइनों में मैं भी खड़ी
रात के मंद मंद अंधेरे से घिरीं
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी।।।

मैं फूल सी कली ख्वाबों से भरी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी.
दिल में छोटी छोटी कहानियां बुनते
लोगों से दिन प्रतिदिन मिलते-जुलते
हजारों दिली तमन्ना मन में भरी
मुश्किलों की डगर में फिर से खड़ी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी।।।।

मैं फूल सी कली ख्वाबों से भरी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी.
ना जाने किसकी नज़र सी लगीं
मैं अच्छी भली खड़ी धड़ाम से गिरी
फूट फूट सुबक सुबक रोकने लगी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी।।।

मैं फूल सी कली ख्वाबों से भरी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी.
पता नहीं कब आया भयानक तुफान
अचानक समुद्र में बढ़ने लगा उफान
सांसें भी न जाने दम सा तोड़ने लगी
न डरी न सहमी बस हालातों से लड़ी।।।।

लड़कियों का संघर्ष
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