Kese Galat Kahu Use Poem by Mohammad Shahadat

Kese Galat Kahu Use

मैं ही उसे हद से ज्यादा चाहने लगा था
पर वो अपनी मरयादा जानती थी
उसे मेरा साथ अच्छा तो लगता था मगर
वो मुझे अपना हमसफर, कहां मानती थी
मैं कैसे गलत कहूं उसे
हमारा साथ में कोई future नही, ये उसने पहले ही समझाया था
तुम बोहोत अच्छे हो, और तुम्हारी
life partner भी बहुत luky होगी,
पर वो खुशनसीब मैं नही हूं, ये उसने पहले भी बताया था
वो हर रिश्ते से पहले मुझे अपना दोस्त मानती थी
एक वही तो थी, जो मुझे अंदर से जानती थी
उसके साथ मंजिल नही थी कोई, पर रास्ते हसीन लगते थे
जब वो साथ होती थी, तो मेरे हर पल बेहतर से बेहतरीन लगते थे
मैं कैसे गलत कहूं उसे
जो वो निभा न सकी, ऐसा उसका कोई वादा नही था
हालाकि उसके जाने पर मैं रोया बहुत, मगर
मुझे रुलाने का उसका कोई इरादा नहीं था
खैर ये तो पुरानी बाते हैं, अब दुआ है कि उसकी जिंदगी
में खुशियों की दिन और खुशियों की रात होगी
अब भी हम दोस्त है, इससे अच्छी और क्या बात होगी

Kese Galat Kahu Use
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
I realised It was my fault that i loved her alot more than she deserv
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