'दिल के ज़ख्म तू भरे मेरे...' Poem by LAKSHAY KANSAL

'दिल के ज़ख्म तू भरे मेरे...'

'दिल के ज़ख्म तू भरे मेरे...'

'इश्क भी बड़ा नादान है,
जिसकी बातों में एक बात है...

हां, यह हसाता भी,
और देखा मैंने इसको रुलाता भी...

दिल में इसने ज़ख्म हज़ारों हैं दिए,
बिन मांगे बिन कहे मैने आंसू हैं पिये...

कुछ नहीं सही तो एक आखिरी काम करदे,
मेरा होकर ही सही मेरे पर एहसान करदे...

लोग आते हैं जाने को और ज़ख्म दे जाते हैं,
अब जिंदगी का क्या मै काहू जो है बस तू ही है...

एतबार नहीं सही ठीक है,
मगर साथ नहीं क्या ये मुनासिफ हैं...

एक अंत ही सही वो भी तेरे करदे,
ज़ख्म गहरे हैं मरहम से ज़रा एहसान करदे...

तू है इश्क मेरा,
तू है जुनून मेरा,
दिल की बात हज़ारों हैं तुझसे,
ना कहु फिर भी इश्क़ है मेरा सिर्फ तुझसे...

Lakshay Kansal

'दिल के ज़ख्म तू भरे मेरे...'
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