मेरी पगलू बीवी कविता राहुल कुमार | Meri Pglu Biwi Poem Author Rahul Kumar Poem by Author Rahul kumar

मेरी पगलू बीवी कविता राहुल कुमार | Meri Pglu Biwi Poem Author Rahul Kumar

मेरी पगलू बीवी हँसी की झरना,
कभी गुस्सा, कभी प्यार का तराना।
उसकी बातों में छुपा है जादू,
हर दिन बन जाता है इक इबादत का वादा।

कभी रूठे तो बच्चे सी लगती है,
कभी हँसे तो फूलों सी महकती है,
उसकी आँखों में शरारत का समंदर,
दिल कहता है — यही है मेरा सुंदर।

पगलू है पर दिल की रानी,
उसकी हँसी से रोशन है मेरी कहानी।
कभी तकरार, कभी मनुहार,
प्यार में डूबा हर एक व्यवहार।

उसकी नादानियाँ भी प्यारी लगती हैं,
उसकी आदतें भी हमारी लगती हैं,
पगलू बीवी का यही है कमाल,
हर पल बना देती है ज़िन्दगी ख़ास।

कभी चाय में चीनी ज़्यादा डाल देती है,
कभी बातें करते-करते सो जाती है,
पर उसकी मासूमियत का असर ऐसा,
दिल कहे — यही है मेरा सच्चा किस्सा।

पगलू है, पर मेरी जान है,
उसकी हँसी मेरी पहचान है,
उसके बिना अधूरी है ये दुनिया,
मेरी बीवी ही मेरी सबसे बड़ी खुशबू है।

Author Rahul Kumar

मेरी पगलू बीवी कविता राहुल कुमार | Meri Pglu Biwi Poem Author Rahul Kumar
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