महके Poem by Narender Singh Bansal

महके

Rating: 5.0

हम तुम्हें देखें
तुंम हमे देखो
इस देखा देखी में
जाने कौन
किसको
कितना देखे

फूल तब ही
महके
जब किसी का
दिल बहके

बगिया तभी महके
जब भँवरा कली कली
बहके

देखा जब हमने
आसमान से शहर को
वो भी बगिया सा ही महके
जाने कौन किसको देखे
जाने कौन बहके
जाने कौन महके

हम तुम्हें देखें
तुंम हमे देखो
इस देखा देखी में
जाने कौन
किसको
कितना देखे

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
Lifes insight
COMMENTS OF THE POEM
Aarzoo Mehek 15 May 2026

Is masoom si ankh micholi main dil ne dil ko pehchan liya. Khoobsurat ehsaas

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