No Time Poem by Kavita Kilam

No Time

ज़िंदगी कितनी तकनीकी हो गयी है
जो फ़ोटो कोडेक से लेते थे
फिर रील लेके बड़े चाव से
एल्बम डेवेलप करवाते थे
जो अब तक सहेज के रखी है
वो तसवीरें बड़े प्यार से देखने को
कुछ लम्हेंसाथगुज़ारा करते थे
अब कैमराहमेशा साथ है और सब एक्स्पेर्ट
छोटे से डब्बे नुमा HD में बंद पढ़ी है
सुनहरी यादें, मीठे से पल
अरे! Time किसके पास है?
अमा जब होगी फुरसत इस busy schedule से
कभी गलती से कोई घर आ जाए
भूला बिसरा कोई (शायद) अपना
तो खोल लेंगे इस बंद डिब्बे को
वोबैठा देखता रहेबेचारा अकेला
(कहा न बातें करने काअब Time नहीं)
घर का खाना? ? ? नहीं भाई swiggy है ना!
क्या कहा? रात भर बचपन relive करेंगे?
न भाई ना!गए वो दिन, वो ज़माने
Live in the present, don't dwell on the past
क्या तुम्हें पता नही अब तो सब कुछ Digital है, सब कुछ
इमोशन्स दिखाने है तो emoticon भेजो
और ज़्यादा हो तो GIF है ना!

क्योंकि No time boss, no Time! ! ! !

To be continued soon...(if Time permits)

Monday, March 2, 2020
Topic(s) of this poem: humour
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
In these times we all seem too busy and have no time for each other @😢😢
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