पतझड़ का आह्वाहन
सोमवार, १ अक्टूबर २०१८
रहने दो ना
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बस मेरी आवाज दबी ही रहने दो मेरी धड़कन को मुझे सुन ने दो वो चीखचीख कर कह रही है सावन में भी पतझड़ का आह्वाहन कर रही है। हसमुख अमथालाल मेहता
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