Poverty Poem by Prakash Jha

Poverty

(मुफलिसी)
ममेरे भाई की शादी थी तो, मैं दुल्हन का देवर होता, , ,
मेरी मां को रोना न आता, अगर मुझे पहनने को ब्लेजर होता, , ,
मेरी मां भी पहनती महंगे गहने, उसमें भी एक तेवर होता, , ,
अगर न देखते मुझपे लोग जल्दी चलने के लिए, मैं भी मां से लिपट के बड़ी देर रोता...

Poverty
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