मेरे दोस्तों,
मैंने तय किया है—
अब मेरे पास
दुश्मन नहीं होंगे।
क्योंकि दुश्मनी
इंसान का नहीं,
उसकी ऊर्जा का
कत्ल करती है।
मैंने देखा है
नफ़रत के हाथों में
कितनी जल्दी
सुंदर दिन
राख बन जाते हैं।
मैंने देखा है
गुस्से की आग में
कैसे
अपना ही मन
जल जाता है।
मैंने भी
कभी दुश्मन बनाए थे—
कुछ लोगों ने
मुझे गिराने की कोशिश की,
कुछ ने
मेरे नाम पर
कीचड़ उछाला।
और मैं…
मैंने भी
कभी-कभी
जवाब में
काँटे उगा लिए।
पर फिर
मैंने अपने भीतर
एक सवाल सुना—
क्या मैं
उनकी बुराई से लड़ते-लड़ते
खुद बुरा बन जाऊँ?
उस दिन
मैंने नफ़रत से कहा—
"मैं तुम्हारा कैदी नहीं।"
मैंने क्रोध से कहा—
"तुम मेरे फैसले नहीं बनोगे।"
मैंने बदले से कहा—
"तुम मेरा रास्ता नहीं तय करोगे।"
अब
अगर कोई मुझे चोट दे,
मैं उसे
वापस चोट नहीं देता।
मैं उसे
अपनी प्रगति दिखाता हूँ।
क्योंकि
सबसे बड़ा जवाब
तलवार नहीं—
तरक्की है।
अब
अगर कोई मेरी पीठ पीछे बोले,
मैं उसकी आवाज़ नहीं सुनता—
मैं अपने लक्ष्य की
धड़कन सुनता हूँ।
क्योंकि
कमज़ोर लोग
बोलकर जीतना चाहते हैं,
और मजबूत लोग
काम करके।
मैं जानता हूँ—
मैं सभी को
खुश नहीं कर सकता।
मैं सभी को
अपना नहीं बना सकता।
पर मैं
अपने मन को
कभी छोटा नहीं बनाऊँगा।
दुश्मन बनाना
बहुत आसान है,
पर खुद को बड़ा रखना
बहुत कठिन।
और मैं
अब कठिन वाला रास्ता चुनता हूँ—
क्योंकि वही
मुझे
मेरा सर्वश्रेष्ठ बनाता है।
तो हाँ,
दुश्मन हैं?
नहीं।
कुछ लोग हैं
जो मुझे पसंद नहीं करते—
मैं उन्हें भी
अपनी शांति में
जगह देता हूँ।
क्योंकि
मेरा दिल
लड़ाई के लिए नहीं—
उड़ान के लिए बना है।
और एक बात…
अगर मैं
दुश्मनी पालूँगा,
तो मैं भी
उसी मिट्टी का बन जाऊँगा
जिससे
मुझे बाहर निकलना था।
इसलिए
मैं मुक्त हूँ।
मैं हल्का हूँ।
मैं शांत हूँ।
और यही
मेरी असली जीत है।
मेरे दोस्तों,
आज मैंने अपने जीवन को
एक वचन दिया है—
अब मेरे पास
कोई दुश्मन नहीं।
— पुष्प सिरोही
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