Pushp Sirohi Poems

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1.
नज़रों की शरारत

तुम्हें पता है,
नज़रों की शरारत
कोई खेल नहीं होती—
ये तो
...

2.
ज़हर की जड़ें

मेरे दोस्तों,
दुश्मन को मारने के लिए
हथियार नहीं चाहिए—
कभी-कभी
...

मेरे दोस्तों,
जब ज़िंदगी
तुम्हारे सामने
दीवार बनकर खड़ी हो जाए—
...

मेरे दोस्तों,
ये बात
लोहे की तरह सच है—
जो मन कहता है
...

मैंने
तुम्हें
प्यार नहीं किया
मैंने
...

6.
मृत्यु ही मर जाएगी

मृत्यु—
तू अभिमानी मत बन।
तू अपने आपको
बहुत ताक़तवर समझती है,
...

7.
Inner Peace

8.
सच्चे मनों का मिलन

मुझे मत रोको उस पवित्र मिलन से
जहाँ दो मन सच के साथ बँधते हैं—
वहाँ प्रेम कोई सौदा नहीं होता,
वहाँ दिल ईमानदारी से धड़कते हैं।
...

9.
मैं तुम्हें चाहूँ

मैं तुम्हें चाहता हूँ—
इस तरह जैसे प्यास
पहली बारिश की खुशबू चाहती है।
...

आओ…
मेरी देहरी पर कदम रखो धीरे से,
जैसे सावन की पहली बूंद
मिट्टी को छू ले—
...

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