जीवन संघर्ष Poem by Pushp Sirohi

जीवन संघर्ष

मेरे दोस्तों,
ज़िंदगी कोई सपना नहीं—
ज़िंदगी कोई बहाना नहीं।
ज़िंदगी
धड़कते सच का नाम है,
जो रोज़
तुम्हारे भीतर
एक आवाज़ जगाता है—

"उठो… और कुछ कर जाओ।"

मत कहो
कि जीवन व्यर्थ है,
मत कहो
कि सब पहले जैसा ही रहेगा।
जो सोचते हैं
"कुछ नहीं बदलता, "
वही लोग
खुद को भी
नहीं बदलते।

समय
तेज़ी से चलता है,
दिन
हाथों से फिसलते हैं,
और घड़ी
रुकती नहीं—
पर दिल में
एक आग हो
तो इंसान
भाग्य बदल देता है।

कल बीत गया,
कल केवल
एक परछाईं है।
और आने वाला कल
एक रहस्य है—
जिसे कोई
आज के बिना
नहीं खोल सकता।

तो सुनो…
जीवन
आज में होता है।

काम करो
उन सपनों के लिए
जो तुमने
खुद के लिए देखे हैं।
लड़ो
उन सचाइयों के लिए
जो तुम्हारे भीतर
जिंदा हैं।

और अगर थक जाओ
तो रुकना नहीं—
बस
अपने कदम
धीमे कर लेना।

क्योंकि
शरीर
एक दिन मिट्टी हो जाएगा,
पर कर्म
याद बनकर
लंबा चलता है।

धन नहीं,
नाम नहीं,
पद नहीं—
कर्म
मनुष्य को
अमर बनाता है।

सुनो,
जीवन
मौज नहीं,
मिशन है।

और मिशन
उनका नहीं होता
जो आराम ढूँढते हैं—
मिशन
उनका होता है
जो जिम्मेदारी उठाते हैं।

मेरे दोस्तों,
सीखो
धैर्य की भाषा,
सीखो
संघर्ष का व्याकरण,
सीखो
हार के बाद भी
मुस्कुराना—

क्योंकि
तुम्हारी मुस्कान
कई टूटे दिलों के लिए
आशा बन सकती है।

और याद रखना—
तुम अकेले नहीं हो।

तुम्हारे पहले भी
लोग चले हैं
अंधेरों से लड़कर,
और अपने पीछे
कुछ निशान छोड़ गए—
जिन्हें देखकर
कई लोग
रास्ता पा गए।

तुम भी
ऐसे ही निशान छोड़ो।

ऐसे निशान
जो कहें—
"यहाँ से
एक बहादुर इंसान
गुज़र चुका है।"

ऐसे निशान
जो कहें—
"यहाँ से
एक जिंदा आत्मा
लड़कर निकली है।"

तो मेरे दोस्तों,
जीवन का अर्थ
सिर्फ़ जीना नहीं—
जीवन का अर्थ है
जीकर कुछ छोड़ जाना।

और सबसे बड़ी बात—
डरो मत।
थको मत।
टूटो मत।

बस
अपना दीपक
जलता रखो।

क्योंकि जीवन
नींद नहीं है—
जीवन
जागने का नाम है।

— पुष्प सिरोही

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