सफलता की पहचान Poem by Pushp Sirohi

सफलता की पहचान

मेरे दोस्तों,
सफलता
सिर्फ़ जीत का शोर नहीं है,
सफलता
सिर्फ़ तालियों का सच नहीं है।

सफलता
वो नहीं
जो दुनिया गिने—
सफलता
वो है
जो आत्मा महसूस करे।

सफलता ये नहीं
कि तुम सबसे आगे निकल जाओ,
सफलता ये है
कि तुम
अपनी सच्चाई से पीछे न हटो।

सफलता ये नहीं
कि तुम ऊँचा बोलो,
सफलता ये है
कि तुम
सही बोलो।

सफलता ये नहीं
कि तुम
लाखों कमा लो,
सफलता ये है
कि तुम
अपनी नींद
सुकून से सो सको।

कि रात को
तकिये पर सिर रखो
और दिल कहे—
"आज मैंने
कुछ गलत नहीं किया।"

सफलता ये नहीं
कि भीड़
तुम्हारा नाम ले,
सफलता ये है
कि कोई
टूटता हुआ इंसान
तुम्हारे कारण
बच जाए।

अगर तुमने
किसी के चेहरे पर
मुस्कान लौटा दी,
अगर तुमने
किसी की उम्मीद
मरने नहीं दी,
अगर तुम्हारे शब्दों ने
किसी की आत्मा को
हल्का कर दिया—

तो समझो
तुम सफल हो।

सफलता ये नहीं
कि तुम
हर बार जीत जाओ,
सफलता ये है
कि तुम
हर बार
उठना सीख जाओ।

गिरकर भी
गरिमा न खोना,
हारकर भी
संस्कार न खोना—
यही
सफलता की पहचान है।

सफलता
एक बड़ी कार नहीं,
एक बड़ा घर नहीं,
एक बड़ा पद नहीं—

सफलता
एक बड़ा दिल है।

ऐसा दिल
जो खुद भी जीता है
और दूसरों को भी
जीना सिखाता है।

और हाँ…
उस दिन को सफलता कहना
जिस दिन तुम
अपने अतीत को
माफ कर सको,
अपने आज को
सुधार सको,
और अपने कल को
डर के बिना
देख सको।

सफलता ये नहीं
कि तुम
दुनिया बदल दो,
सफलता ये है
कि दुनिया
तुम्हें न बदल पाए—
और तुम
अपनी अच्छाई
बचा सको।

तो मेरे दोस्तों,
अगर तुमने
ईमानदारी से मेहनत की,
नम्रता से आगे बढ़े,
और सच्चे दिल से
किसी को प्यार दिया—

तो समझ लेना,
तुम्हारे पास
वो सफलता है
जिसे कोई
छीन नहीं सकता।

यही सफलता है।

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