Friday, January 16, 2026

धूप से भी उजली मोहब्बत Comments

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क्या मैं तुम्हें धूप भरी सुबह कह दूँ?
पर सुबह तो बदलती है, ढलती है, थकती है—
कभी हवा रूठ जाती है, कभी धूप जलती है,
कभी फूलों की हँसी भी पल भर में चुकती है।
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Pushp Sirohi
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