मैं बहुत दूर—
उस नीले आसमान तक जाता हूँ
जहाँ चाँद
अपनी तन्हाई से
तारे गढ़ता है।
वहीं कहीं
मेरी मोहब्बत रहती थी—
मेरी कोयल।
वो धरती की लड़की नहीं थी,
वो…
किसी टूटे तारे की मुस्कान थी,
रात की पलकों पर
ठहरी हुई रौशनी थी।
जब वो बोलती—
तो हवा भी
अपना शोर भूल जाती,
और बादल
रुककर उसे सुनते।
मैं उसे देखता
तो लगता—
जैसे अंधेरे की रगों में
किसी ने
इश्क़ का सूरज रख दिया हो।
हम दोनों
एक ही आसमान के
दो मुकाम थे,
और फिर भी
हमारी मोहब्बत
बिजली से तेज़
और रौशनी से सच्ची थी।
लेकिन दुनिया…
दुनिया को
ऊँचाइयाँ हमेशा चुभती हैं।
कुछ जलती हवाएँ उठीं—
और ईर्ष्या ने
बर्फ़ की उँगलियों से
उसकी साँसें छीन लीं।
उस रात
चाँद की आँखें झुक गईं,
तारे
टूट-टूट कर गिरने लगे,
और आसमान
मेरे भीतर
पहली बार खाली हुआ।
लोग कहते हैं—
"वो चली गई।"
पर मैं कैसे मान लूँ?
जो मेरे दिल में
आसमान बनकर रहती थी
वो मेरे पास से
कहाँ जा सकती है?
अब वो
हर रात
किसी तारे की तरह
मेरे माथे पर उतर आती है,
और जब मैं टूटता हूँ—
मेरी आँखों में
बारिश बनकर बह जाती है।
मैं हवा से कहता हूँ—
धीरे चल…
वो सुन रही होगी।
मैं चाँद से कहता हूँ—
अपनी रोशनी कम मत कर,
वो मेरी तरफ़ देख रही होगी।
क्योंकि
मौत का भी
एक नियम है—
वो शरीर ले सकती है,
मोहब्बत नहीं।
और मैं—
मैं तो बस
उस नीले आसमान का
एक दीवाना परिंदा हूँ
जो हर रात
अपनी कोयल को
तारों में खोजता है।
हाँ…
उसका जिस्म दूर है,
पर उसकी रूह
मेरे चारों तरफ़
आसमान की तरह है।
और जो लोग
मेरे इश्क़ पर हँसते हैं—
उन्हें क्या पता,
मैं मोहब्बत को
ज़मीन पर नहीं,
आसमान पर लिखता हूँ।
मैं आसमान का पुष्प हूँ—
और मेरी साँसों में
अब भी
कोयल का नाम चमकता है।
— पुष्प सिरोही
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