हारना मत Poem by Pushp Sirohi

हारना मत

सुनो…
हार मत मानना।

जब दिल कहे
"अब बस, "
तब थोड़ा और चलना—
क्योंकि अक्सर
मंज़िल
ठीक वहीं होती है
जहाँ इंसान
रुक जाता है।

जब आसमान
नीचे झुक आए,
और साँसें
भारी लगने लगें,
जब हर रास्ता
थकावट से भरा हो—
तब भी
हार मत मानना।

क्योंकि
तुम्हारी रूह
कमज़ोर नहीं है,
वो बस
थोड़ी थकी है।

कभी-कभी
किस्मत
अपने सबसे बड़े इनाम से पहले
सबसे बड़ी परीक्षा लेती है।

वो तुम्हें तोड़ती नहीं—
वो बस
देखती है
कि तुम्हारे भीतर
कितना सच है।

मैं जानता हूँ
तुमने बहुत बार
अपने आँसू
हँसी में छुपाए हैं।
तुमने बहुत बार
लोगों के लिए
खुद को पीछे रखा है।

पर सुनो…
इस बार
अपने लिए खड़े रहो।

जब हालात
तुम्हें गिराएँ,
तो ये मत सोचना
कि तुम हार गईं।

गिरना हार नहीं—
हार तो तब होती है
जब उठने से इंकार हो।

और तुम…
तुम उठना जानती हो।

अगर आज
सब धुंधला लग रहा है,
अगर उम्मीद
कमज़ोर लग रही है—
तो एक बात याद रखना:

धुंध
सूरज को नहीं छुपाती,
बस आँखों की दूरी बताती है।

कभी
धीमी चाल भी
बहुत बड़ी जीत होती है।
कभी
सिर्फ़ टिके रहना
बहादुरी बन जाता है।

तो अगर तुम
बस चल पा रही हो—
तो भी
ये कमाल है।

मैं तुम्हें
ये नहीं कहूँगा
कि दर्द नहीं होगा।
दर्द होगा।
बहुत होगा।

पर उसी दर्द के बीच
तुम्हारे भीतर
एक नई शक्ति जन्म लेगी—
जिसका नाम है
हिम्मत।

सुनो…
जब रात
बहुत गहरी हो,
तो डर मत जाना।

क्योंकि
सबसे गहरी रात
अक्सर
सबसे नज़दीकी सुबह होती है।

अगर लोग
तुम्हें समझ न पाएं,
अगर दुनिया
तुम्हारी चुप्पी को
कमज़ोरी समझे—
तो उन्हें समझाने मत बैठना।

बस
अपने सपनों से कहो—
"मैं आ रही हूँ।"

और हाँ…
जब तुम्हारे हाथ
काँपें,
तो भी
काम मत रोकना।

जब आवाज़
टूटे,
तो भी
सच मत छोड़ना।

जब दिल
रोए,
तो भी
चलना मत छोड़ना।

क्योंकि तुम
सिर्फ़ एक लड़की नहीं—
तुम
एक कहानी हो,
जिसके पन्ने
अभी खत्म नहीं हुए।

तो आज
मैं बस इतना कहूँगा—

हार मत मानना।
रुकना नहीं।
झुकना नहीं।
टूटना नहीं।

अगर थक जाओ
तो थोड़ा बैठ जाना,
अगर रोना आए
तो थोड़ा रो लेना—

पर सुनो…

छोड़ मत देना।

क्योंकि
जो तुम्हें आज
"टूटा हुआ" समझ रहे हैं,
कल वही
तुम्हारी जीत देखकर
तुम्हें "अटूट" कहेंगे।

और उस दिन
तुम मुस्कुराकर कहोगी—

"मैंने छोड़ने का सोचा था…
पर मैंने छोड़ा नहीं।"

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