रात की तरह सुंदर Poem by Pushp Sirohi

रात की तरह सुंदर

वो सौंदर्य में चलती है—
जैसे रात चलती है
तारों की धीमी रोशनी में,
जहाँ उजाला भी
शोर नहीं करता,
और अंधेरा भी
डर नहीं देता।

मैंने उसे पहली बार देखा,
तो लगा—
जैसे किसी शाम ने
अपनी पूरी नज़ाकत
एक चेहरे में उतार दी हो।
वो आई…
और मेरे भीतर
दिन भर का शोर
अपने आप
धीमा होने लगा।

उसके बाल—
काली घटाओं की तरह,
पर उनमें उदासी नहीं,
एक गरिमा थी…
जैसे रात का अंधेरा
बस अंधेरा नहीं,
सुकून का नक़्शा हो।

उसके माथे पर
एक साफ़ उजाला था—
ऐसा उजाला
जो चुभता नहीं,
बस ठहरता है।
और उसकी आँखों में—
किसी गहरी रात की शांति,
जिसमें हजारों भाव
बिना बोले
समझ आ जाते हैं।

वो मुस्कुराती है तो
जैसे चाँदनी
पानी पर उतर आए,
और पानी
पवित्र हो जाए।
वो चुप हो जाए तो
मुझे लगता है
किसी मंदिर में
घंटी बजने से पहले
जो मौन होता है—
वही मौन
उसकी पलकों में रहता है।

मैं उसे देखता हूँ
और सोचता हूँ—
कितनी सधी हुई है उसकी खूबसूरती,
जैसे वो जानती हो
कि आकर्षण का सबसे बड़ा गुण
विनम्रता है।
उसकी चाल में
कोई दिखावा नहीं,
कोई "देखो मुझे" नहीं—
वो बस चलती है,
और हवा तक
संयम सीखती है।

उसके चेहरे पर
रौशनी और साया
एक साथ रहते हैं—
ना रौशनी ज्यादा,
ना साया ज्यादा,
जैसे कुदरत ने
दो विरोधी रंगों को
एक प्रेम में पिरो दिया हो।

और हाँ…
कभी-कभी
मैं उसके पास खड़ा होता हूँ
और भीतर ही भीतर
अपने आप को
थोड़ा बेहतर महसूस करता हूँ,
क्योंकि कुछ लोग
सिर्फ़ सुंदर नहीं होते—
वे सामने वाले को
सुंदर बना देते हैं।

उसके शब्द
कम होते हैं,
पर असर
बहुत गहरा होता है।
उसकी बातें
आग नहीं बनतीं,
वो रोशनी बनती हैं।
वो चोट नहीं देती,
वो सुधार देती है—
यही उसकी सबसे बड़ी
खूबसूरती है।

मैंने बहुत से चेहरे देखे हैं,
बहुत सी चमकें भी—
पर उसकी चमक
किसी बाजार की तरह नहीं,
किसी तीज-त्योहार की तरह नहीं—
वो चमक
अंदर की है,
जैसे आत्मा के पास
अपना दीपक हो।

उसके भीतर
कुछ ऐसा निर्मल है,
कि मुझे लगता है—
वो जितनी सुंदर है,
उतनी ही
पवित्र भी है।

और यही पवित्रता
उसकी सुंदरता को
और ऊँचा कर देती है—
क्योंकि
सच्चा सौंदर्य
कभी तेज़ नहीं होता,
वो शोर नहीं करता,
वो बस
ठहर जाता है।

वो मेरे सामने आती है
तो मैं शब्द खोजता हूँ,
पर शब्द भी
कम पड़ जाते हैं—
क्योंकि
कुछ एहसास
कविता नहीं,
इबादत माँगते हैं।

वो सौंदर्य में चलती है…
और उसके पीछे
एक खामोश-सा असर रह जाता है,
जैसे रात के बाद
मन में
तारों की याद रह जाती है।

और मैं…
मैं बस इतना जानता हूँ—
उसकी मौजूदगी
मेरे दिन को
कम थकाती है,
मेरे दिल को
ज्यादा सच्चा बनाती है।

वो रात की तरह सुंदर है—
और शायद…
इसीलिए
मेरे भीतर की दुनिया
उसके पास आकर
शांत हो जाती है।

— पुष्प सिरोही

रात की तरह सुंदर
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