Saturday, March 14, 2026

गलियों के 'बादशाह' और अक्ल के खाली Comments

Rating: 0.0

बड़े मज़े में देखता हूँ, इन गली के आवारा फकीरों को,
जो सड़कों की धूल छानकर, कोसते हैं अपनी लकीरों को।
सारा दिन यूँ ही भटकते हैं, जैसे कोई बड़ा काम हो,
मगर जेब में फूटी कौड़ी नहीं, बस आवारागर्दी का नाम हो।
...
Read full text

Pushp Sirohi
COMMENTS
Close
Error Success