शरारत वाली मोहब्बत Poem by Pushp Sirohi

शरारत वाली मोहब्बत

1. शरारत वाली मोहब्बत

मैं तुझे देख कर
सीधा नहीं,
थोड़ा टेढ़ा मुस्कुराता हूँ।
क्योंकि सीधी मोहब्बत सब करते हैं,
मैं शरारत में इज़्ज़त मिलाता हूँ।

तेरी आँखों से बहस करता हूँ,
और हार कर भी जीत जाता हूँ।
मैं छूता नहीं हर बार,
कभी-कभी बस
नज़रों से तुझे सताता हूँ।

— पुष्प सिरोही

2. मोहब्बत, जो हद में शरारत रखे

मैं तुझे पाने की जल्दी में नहीं,
तुझे हँसाने की आदत में हूँ।
तेरी नाराज़गी भी संभाल लेता हूँ,
क्योंकि मैं मोहब्बत
समझदारी में करता हूँ।

मैं तुझे देख कर
सब कुछ भूल सकता हूँ,
पर तेरी इज़्ज़त
कभी नहीं भूलता।
शरारती हूँ,
पर सस्ता नहीं।

— पुष्प सिरोही

3. अगर कोई चाहे ऐसे

मैं तुझे रोकूँ नहीं,
बस तुझसे जलन थोड़ी करता हूँ।
क्योंकि जो दिल से चाहता है,
वो थोड़ा शरारती
ज़रूर होता है।

मैं तुझे भीड़ में देखकर
सीना तान लेता हूँ—
हाँ, ये मेरी है।
क्योंकि मोहब्बत
दिखावा नहीं,
खामोश दावा होती है।

— पुष्प सिरोही

4. शरारती, पर सुरक्षित

मैं वो नहीं
जो रात भर मीठी बातें करे,
और सुबह बदल जाए।
मैं वो हूँ
जो तुझ पर हक़ नहीं जताए,
पर ज़रूरत पड़े तो
तेरे आगे दीवार बन जाए।

मैं शरारत करता हूँ
तुझे हँसाने के लिए,
और मोहब्बत करता हूँ
तुझे सुरक्षित रखने के लिए।

— पुष्प सिरोही

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
मोहब्बत शायरियों पर एक नोट यह शायरियाँ किसी को जीतने के लिए नहीं लिखी गईं, ये किसी को सुरक्षित महसूस कराने के लिए लिखी गई हैं। यहाँ मोहब्बत शोर नहीं करती, वह धीमे-धीमे दिल के पास बैठ जाती है। इन पंक्तियों में कब्ज़ा नहीं है, कदर है। डर नहीं है, भरोसा है। यह मोहब्बत रोकती नहीं, साथ चलती है। बदलती नहीं, स्वीकार करती है। इन शायरियों में वो चाहत है जो रात की तरह चुप है, और सुकून की तरह गहरी है। यहाँ इज़हार भी फुसफुसाहट में होता है, और वादा ठहराव में। अगर इन पंक्तियों को पढ़ते हुए किसी के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ जाए, तो समझ लेना— मोहब्बत ने अपना काम कर दिया। ये शायरियाँ किसी को बाँधने के लिए नहीं, किसी को ख़ुद बनने देने के लिए हैं। — Pushp Sirohi
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success