आज मेरे दिल का जन्मदिन है, प्रिये—
क्योंकि तुम आई हो।
और जिस दिन से
तुम मेरे भीतर उतरी हो,
मेरी दुनिया ने
रंगों की भाषा सीख ली है।
मेरा दिल—
पहले भी धड़कता था,
पर अब
उसमें गीत पलते हैं।
पहले भी जिंदा था,
पर अब
उसमें अर्थ बसता है।
तुम्हारे बिना
मैं जैसे
एक सूखा-सा मौसम था—
जिसमें बारिश का नाम
बस किताबों में लिखा होता है।
पर तुम…
तुम मेरे भीतर
वसंत बनकर आई हो।
और अब मेरी सांसें
हर पल
खुशबू पहनती हैं।
आज मैं चाहता हूँ
कि तुम्हारे लिए
एक सिंहासन बनाऊँ—
पर सोने का नहीं,
मेरे विश्वास का।
मैं चाहता हूँ
कि तुम्हारे नाम से
एक महल बनाऊँ—
पर पत्थरों का नहीं,
मेरी वफ़ा का।
आज मैं
अपनी हथेलियों में
तुम्हारे लिए
मीठे वादे रखता हूँ,
और अपनी पलकों में
तुम्हारे लिए
शांत दुआएँ।
मैं चाहता हूँ
कि हर ख़ुशी
तुम्हारे आँगन में
नर्म कदम रखे,
और हर दुख
तुम्हारे दरवाज़े से
लौट जाए।
तुम्हारी हँसी—
मेरे लिए
अनार के दानों-सी है,
लाल, चमकदार,
और जीवन से भरी हुई।
तुम्हारी आँखें—
मेरे लिए
नीले आकाश की तरह हैं,
जिनमें
उम्मीद के पंछी
रोज़ उड़ते हैं।
और तुम्हारा होना…
मेरे लिए
किसी शहद की नदी जैसा है
जो थकान के बाद
रूह तक मीठा उतर जाए।
आज मेरे भीतर
इतना प्रेम है
कि मैं शब्दों से डरता हूँ—
कहीं कम न पड़ जाएँ।
इसलिए मैं बस
तुमसे इतना कहता हूँ—
अगर कोई पूछे
"क्या मिला तुम्हें? "
तो मैं मुस्कुरा कर कहूँ:
"आज मेरे दिल का जन्मदिन है—
क्योंकि मेरी दुनिया में
तुम हो।"
— पुष्प सिरोही
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