मेरा देश केवल मानचित्र नहीं है,
यह मेरी आत्मा की पहचान है।
यहाँ मिट्टी भी वर्दी पहनती है,
और हवा में भी सम्मान है।
मेरे पिता ने वर्षों तक पढ़ाया,
किताबों में भारत बसाया।
32 साल सेवा का अर्थ सिखाया,
शिक्षक बन मास्टर जी कहलाया।
उन्होंने बताया देश-प्रेम ऐसा,
जो नारों में नहीं ढलता है।
ज़रूरत पड़ी तो जान भी दे दें,
यह भारत हमसे यही कहता है।
भाई ने सीमा को घर माना,
नींद छोड़ देश को अपनाया।
उसने सिखाया शांति का मूल्य,
जब हथियारों ने मौन सिखाया।
पर देशभक्ति केवल वर्दी में नहीं,
यह सोच और कर्म की पहचान है।
दिल में अगर भारत बसता हो,
तो हर श्रम भी बलिदान है।
मैं भी देश के लिए जीता हूँ,
अपने कर्मों से राह बनाता हूँ।
IBM में युवाओं को अवसर देकर,
मैं उनका भविष्य सजाता हूँ।
नवयुवकों को जीवन देना भी,
देश को आगे बढ़ाने का काम है।
कलम, कंप्यूटर, ज्ञान और अवसर—
सब भारत सेवा के नाम हैं।
देशभक्ति तलवार से ही नहीं,
निर्माण से भी निभाई जाती है।
जो हर काम भारत को आगे ले जाए,
वही सच्ची देशभक्ति कहलाती है।
मेरा गर्व शब्दों में सीमित नहीं,
कर्तव्य से मेरी पहचान है।
मैं भारत हूँ, भारत मुझमें है,
और यही मेरी शान है।
— पुष्प सिरोही
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