आशा—पंखों वाली बात Poem by Pushp Sirohi

आशा—पंखों वाली बात

आशा—
एक नन्ही-सी
पंखों वाली बात है,

जो सीने में
चुपचाप
घर कर लेती है।

यह कोई
शब्द नहीं—
यह एक धुन है,

जो बिना कहे
भीतर-भीतर
गुनगुनाती है।

तूफ़ान आएँ,
तो भी
उसका गीत नहीं टूटता,

बस
और धीमा होकर
और गहरा हो जाता है।

कभी-कभी
जब सब कुछ
खोया हुआ लगे,

वही छोटी-सी
पंखों वाली
चिंगारी—

अंधेरे के बीच
एक
उजाला बन जाती है।

वो
कुछ नहीं मांगती,
ना कारण,
ना कीमत—

बस
हवा के भरोसे
उड़ती रहती है।

और सबसे
अजीब बात ये—
कि मेरे भीतर
इतनी सी जगह में

वो
पूरा आसमान
समेट लेती है। --पुष्प सिरोही

आशा—पंखों वाली बात
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success