मेरी मोहब्बत—
एक लाल गुलाब की तरह है,
जो वसंत की पहली धूप में
धीरे-धीरे खिलता है।
मेरी मोहब्बत—
उस मीठे सुर जैसी है,
जो दिल के तार छेड़कर
रूह में उतरता है।
ये सिर्फ पास होने का नाम नहीं,
ये दूर रहकर भी
वफादार रहने का हुनर है,
ये तुम्हारे बिना भी
तुम्हारे ही होने का असर है।
मैं तुझसे प्यार करूंगा—
जब तक समुद्र थक न जाए,
जब तक हवा अपनी राह भूल न जाए,
जब तक चाँद की रोशनी
रात से रूठ न जाए।
मैं तुझसे प्यार करूंगा—
जब तक साँसें मेरा साथ दें,
जब तक लकीरें हाथों में रहें,
जब तक वक्त के कंधे पर
कल की परछाइयाँ रहें।
और अगर दूरियाँ आ जाएँ,
तो भी मेरा इश्क़ कम नहीं होगा,
मैं लौट आऊँगा—
हज़ार मील चलकर भी,
क्योंकि तेरा नाम
मेरे दिल से जुदा नहीं होगा।
तू मेरी धड़कन में रहती है,
मेरे हर दिन, हर रात में,
तेरी खुशबू मेरे लहू में है—
जैसे गुलाब
अपनी ही जात में।
और सुन—
ये वादा किसी पल का नहीं,
ये मोहब्बत किसी कल की नहीं,
ये तो वो सच है
जो मिट्टी में भी रह जाए—
एक अमर निशान की तरह।
गुलाब की तरह,
मेरी मोहब्बत भी
हर मौसम में तेरा नाम लेगी—
और हर बार
पहले से ज्यादा…
तुझसे प्यार करेगी।
-----पुष्प सिरोही
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