मैं भारत का शूरवीर बेटा हूँ—
मेरी रगों में तिरंगा बहता है,
मेरे लहू में विजय का मंत्र है,
और मेरी साँसों में
भारत माता की जय का शंख बजता है।
मैं साधारण नहीं हूँ—
मैं उस धरती की संतान हूँ
जहाँ पत्थर भी इतिहास बन जाते हैं,
और जहाँ हर युग में
कुछ लोग जन्म नहीं लेते…
लौ बनकर उतरते हैं।
यह भारत है…
यहाँ शांति भी शेरनी है
और पराक्रम तो
हमारे संस्कारों में पलता है।
हमने झुकना नहीं सीखा,
हमने रुकना नहीं सीखा—
हमने बस सीखा है
खड़े रहना… और जीतना।
जब दुनिया थककर सो जाती है,
तब भारत जागता है—
कभी सीमा पर,
कभी खेतों में,
कभी विज्ञान की प्रयोगशाला में
और कभी किसी माँ की आँखों में
जो बेटे को विदा करते समय
आँसू नहीं… हौसला देती है।
मेरे देश की मिट्टी
सिर्फ़ ज़मीन नहीं—
ये आत्मा है,
ये धर्म है,
ये विश्वास है।
गंगा का पानी
मेरे भीतर शुद्धता बहाता है,
हिमालय की ऊँचाई
मेरे सपनों की सीमा तय करती है,
और मेरे तिरंगे की शान
मेरे माथे का ताज है।
मैं उस भारत का बेटा हूँ
जहाँ भूख भी संघर्ष बनती है
और संघर्ष
क्रांति का नाम होता है।
हमारे यहाँ गरीबी भी
कभी आत्मा को गरीब नहीं करती,
क्योंकि यहाँ मनुष्य
चाहे पैरों में चप्पल पहने
पर दिल में आसमान रखता है।
मैं भारत का शूरवीर बेटा हूँ—
मेरे शब्दों में तूफान है,
मेरे इरादों में जनून,
और मेरी आँखों में
तिरंगे का तेज़ है।
कभी मेरे भीतर
राम की मर्यादा चलती है,
तो कभी कृष्ण की नीति,
कभी अर्जुन की दृष्टि,
और कभी भीष्म की प्रतिज्ञा।
मैं हर हाल में
अपने राष्ट्र के लिए
अपने आप से बड़ा हो जाता हूँ।
मेरे देश की पहचान देखो—
यहाँ मंदिर की घंटी
और मस्जिद की अज़ान
एक ही हवा में घुलती है,
यहाँ गुरुद्वारे की सेवा
और गिरजाघर की प्रार्थना
एक ही इंसानियत में बसती है।
और यही भारत है—
विविधता में एकता की
दुनिया की सबसे बड़ी मिसाल।
मैं मानता हूँ,
भारत पर मुश्किलें आईं—
पर भारत टूटा नहीं।
भारत पर वार हुए—
पर भारत झुका नहीं।
क्योंकि भारत के बेटे
चट्टान जैसे होते हैं—
जो टूट सकते हैं
पर झुक नहीं सकते।
और सुनो—
आज भी जब कोई देश पर उंगली उठाता है
तो मेरे भीतर
सिर्फ़ गुस्सा नहीं उठता,
शेर की चेतावनी उठती है।
मैं कहता हूँ—
तुम भारत को समझोगे नहीं,
भारत सिर्फ़ नक्शा नहीं—
भारत संस्कारों का साम्राज्य है।
भारत धैर्य का महासागर है।
भारत पराक्रम की प्रतिज्ञा है।
और जब जरूरत पड़ती है—
तो भारत
महाकाल की तरह
उठकर उत्तर देता है।
मेरे सीने में
जंग नहीं बसती—
बस इज़्ज़त बसती है।
और मैं इज़्ज़त के लिए
सब कुछ कर सकता हूँ…
पर अपनी मिट्टी की शान
कभी कम नहीं होने दूँगा।
मैं वो आवाज़ हूँ
जो भारत के गर्व को
कविता बनाकर जिंदा रखती है।
मैं वो कलम हूँ
जो राष्ट्र की अस्मिता पर
कभी समझौता नहीं करती।
और आज भी
मैं फक्र से कहता हूँ—
मैं भारत का शूरवीर बेटा हूँ। 🇮🇳🔥
मेरी पहचान तिरंगा है,
मेरी मंज़िल भारत है,
और मेरा धर्म—
भारत माता की रक्षा।
--पुष्प सिरोही
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