शांति का चयन Poem by Pushp Sirohi

शांति का चयन

शांति भंग करना भी एक आतंक है,
यह बंदूक से ही नहीं,
शब्दों और विचारों से भी फैलता है।

जो मनुष्यों के बीच
अविश्वास की आग बोते हैं,
वे समाज के दीप नहीं,
अंधकार के दूत होते हैं।

इसलिए सावधान रहो—
उनके शोर में शामिल मत हो,
उनकी भीड़ में खड़े मत हो।

क्योंकि इतिहास ने सिखाया है,
अराजकता के साथ चलने वाले
अंततः स्वयं ही राख बन जाते हैं।

शांति चुनो।
क्योंकि वही एक शक्ति है
जो सभ्यता को जीवित रखती है।

जय हिंद
— पुष्प सिरोही

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