मैं हिंदुस्तान हूँ,
केवल जन्म से नहीं—
कर्तव्य से।
मेरे घर में देश
किसी दीवार पर टंगा चित्र नहीं था,
वह रोज़ जीया जाता था।
मेरे पिता ने
32 वर्षों तक
किताब हाथ में रखी,
और भारत मन में।
भारतीय सेना 🇮🇳 में शिक्षक बनकर 'मास्टर जी' कहलाए,
पर हर पाठ में
राष्ट्र की रीढ़ खड़ी की।
उन्होंने सिखाया—
देशभक्ति शोर नहीं करती,
वह चरित्र में बसती है।
मेरा भाई
सीमा पर खड़ा है,
जहाँ रातें लंबी
और जिम्मेदारियाँ उससे भी लंबी होती हैं।
उसने नींद छोड़ी
ताकि मेरा देश
सुकून से सो सके।
और मैं—
मैं भी देश के लिए जीता हूँ।
मैंने वर्दी नहीं पहनी,
पर जिम्मेदारी जरूर पहनी है।
IBM में
मैं नवयुवकों को
सिर्फ़ नौकरी नहीं देता,
मैं उन्हें
जीवन बनाने का अवसर देता हूँ।
क्योंकि मैंने सीखा है—
जब युवा मजबूत होते हैं,
तो देश अपने आप मजबूत होता है।
देशभक्ति
सिर्फ़ सीमा पर खड़े होकर नहीं होती,
अगर दिल में भारत हो
तो हर ईमानदार काम
राष्ट्र को आगे बढ़ाने का यज्ञ बन जाता है।
ज़रूरत पड़ी
तो जान भी दे देंगे,
क्योंकि यह हिंदुस्तान
हमें जीना ही नहीं,
बल्कि सही तरह से जीना सिखाता है।
मैं नारा नहीं हूँ,
मैं उदाहरण हूँ।
मैं गर्व नहीं माँगता,
मैं उसे अर्जित करता हूँ।
मैं हिंदुस्तान हूँ—
और मुझे भारतीय होने पर
पूरा गर्व है।
— पुष्प सिरोही 🇮🇳
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