मेरे दोस्तों—अंत तक निभाना Poem by Pushp Sirohi

मेरे दोस्तों—अंत तक निभाना

मेरे दोस्तों,
जब ज़िंदगी
तुम्हारे सामने
दीवार बनकर खड़ी हो जाए—
तो डरना मत।

दीवारें
रोकने के लिए नहीं होतीं,
वे बताती हैं
कि अब तुम्हें
और मज़बूत होना है।

मेरे दोस्तों,
जब रात
लंबी लगे,
और रास्ता
अंधेरे में गुम हो जाए—
तो भी
अपना दीपक
बुझने मत देना।

क्योंकि
सबसे गहरी रात
अक्सर
सबसे नज़दीकी सुबह होती है।

मेरे दोस्तों,
कभी-कभी
लोग साथ छोड़ जाते हैं,
रिश्ते थक जाते हैं,
और उम्मीद
पतली हो जाती है—

पर सुनो…
तुम्हारी आत्मा
कमज़ोर नहीं।
तुम बस
एक नयी परीक्षा के
दरवाज़े पर खड़े हो।

मेरे दोस्तों,
जब लगे
कि अब तुम्हारे पास
कुछ नहीं बचा—
तो याद रखना,
तुम्हारे पास
तुम खुद बचे हो।

और जो खुद को पा ले,
वो फिर
सब कुछ पा सकता है।

मेरे दोस्तों,
गिरना कोई हार नहीं—
हार तो तब होती है
जब उठने से इंकार हो।

तुम्हारे घुटनों की मिट्टी
बताती है
कि तुम गिरे नहीं,
तुमने
युद्ध किया है।

मेरे दोस्तों,
कभी तुम्हारे हाथ काँपेंगे,
कभी आवाज़ टूटेगी,
कभी आँसू आ जाएँगे—

आने दो।

ये आँसू
कमज़ोरी नहीं,
ये तो
तुम्हारी सच्चाई के
मोती हैं।

मेरे दोस्तों,
जीत हमेशा
ढोल-नगाड़ों के साथ नहीं आती।

कभी जीत
बस इतनी होती है—
कि तुमने
आज भी
हार नहीं मानी।

कि तुमने
आज भी
अपनी मेहनत से
बेईमानी नहीं की।

मेरे दोस्तों,
अगर दुनिया कहे
"तुमसे नहीं होगा, "
तो मुस्कुरा देना।

और अपने कर्म से कहना—
"देख लेना…
मैं कर के दिखाऊँगा / दिखाऊँगी।"

मेरे दोस्तों,
जब ज़िंदगी
तुम्हें तोड़ने आए,
तो अपने भीतर
वो लोहे जैसी जिद जगाना
जो कहती है—

"मैं टूटूँगा नहीं,
मैं बनूँगा।"

मेरे दोस्तों,
जो शुरू किया है,
उसे बीच में मत छोड़ना।

क्योंकि
मुकाम तक
सिर्फ़ वही पहुँचते हैं
जो रास्ते की
धूल को भी
सम्मान देते हैं।

मेरे दोस्तों,
अगर थक जाओ
तो बैठ जाना,
अगर रोना आए
तो रो लेना—

लेकिन सुनो…
छोड़ना मत।

मेरे दोस्तों,
क्योंकि ये दुनिया
देखती है
कौन डरकर रुकता है,
और कौन आँधी में भी
चलता रहता है।

तुम
आँधी में चलने वालों में से हो।

तो मेरी आख़िरी बात
ध्यान रखना:

मेरे दोस्तों—
इसे अंत तक निभाना।
हर हाल में।
पूरी हिम्मत से।
पूरे सम्मान से।

क्योंकि
तुम्हारी कहानी
हार के लिए नहीं लिखी गई—
तुम्हारी कहानी
विजय के लिए लिखी गई है।

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