युवा भारत ऐसा हो
जो भीड़ नहीं, तूफ़ान बने।
जो अन्याय देखे तो चुप न रहे,
बल्कि व्यवस्था की नींव हिलाने का कारण बने।
युवा भारत ऐसा हो
जिसकी आँखों में डर नहीं,
और जुबान पर सच हो—
चाहे सामने कोई भी हो।
युवा भारत ऐसा हो
जो कुर्सी से नहीं,
कर्म से सत्ता बदले।
जो भ्रष्ट तंत्र को
सीधे उसकी जड़ों से उखाड़ फेंके।
युवा भारत ऐसा हो
जो धर्म को हथियार नहीं,
चरित्र बनाए।
जो नफरत नहीं,
राष्ट्र के लिए आग बनाए।
युवा भारत ऐसा हो
जो गंदगी को कोसे नहीं,
खुद उसे जलाकर राख कर दे।
जो अशिक्षा पर भाषण न दे,
बल्कि ज्ञान से उस पर प्रहार कर दे।
युवा भारत ऐसा हो
जिसे रिश्वत घिनौनी लगे,
और ईमानदारी गर्व लगे।
जो भूखा रह ले
पर देश को बेचकर अमीर न बने।
युवा भारत ऐसा हो
जहाँ बेटा-बेटी भेद नहीं,
दोनों रुद्र की शक्ति हों।
जहाँ नारी सम्मान नहीं माँगे,
वह स्वयं न्याय की मूर्ति हो।
युवा भारत ऐसा हो
जो वर्दी को पूजा माने,
पर बिना वर्दी भी
राष्ट्र के लिए जान लगाए।
युवा भारत ऐसा हो
जो कहे नहीं— "कोई और करेगा",
बल्कि दहाड़ कर कहे—
"अगर नहीं किया गया,
तो मैं करूँगा।"
युवा भारत ऐसा हो
जो सोशल मीडिया का योद्धा नहीं,
जमीनी क्रांति का अग्रदूत बने।
जो पोस्ट नहीं,
इतिहास लिखे।
युवा भारत ऐसा हो
जो टूटे भारत को जोड़ दे,
और सड़े सिस्टम को तोड़ दे।
जो समझौता नहीं,
परिवर्तन लेकर चले।
यही युवा भारत चाहिए—
शांत नहीं,
रुद्र।
— पुष्प सिरोही 🇮🇳
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