क्या मेरा प्यार झूठा था? Poem by Rajib Baruah

क्या मेरा प्यार झूठा था?

किसीने कहा था
प्यार कभी हारता नहीं
के प्यार कभी हारता नहीं
और अगर हार गया तो वह प्यार कभी सच्चा था ही नहीं
तो क्या इसका मतलब मेरा प्यार झूठा था?
में जो उसकी आंखो को देखते ही
हमेशा खो सा जाता था
उसे दुख में देख
में खुद रो देता था
उसकी आवाज सुनके
मदहोश सा हो जाता था
उसकी मुस्कुराहट देखते ही
खुद भी मुस्कुराने लगता था
उससे बात करते ही
मेरा मण नाचने सा लगता था
उससे मिलने को मेरा दिल हमेशा
बेकरार रहता था
आख खुलते हुए उसके याद और
आख बंद करते हुए उसके ख्वाब देखता था
में जो सुबह शाम भगवान से उसीको पाने की
मन्नत रखता था
क्या इंसबके बाबजूद मेरा प्यार झूठा था?

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