Ramayan Ki Naari मंदोदरी (Hindi) Poem by S.D. TIWARI

Ramayan Ki Naari मंदोदरी (Hindi)

मंदोदरी

लंका में भी धर्म पर चली
रावण की भार्या मंदोदरी

सीता की रक्षा मन में विचारी
मुझ जैसी वो भी है नारी
हर कर लाये, वो पड़ी लाचारी
लौटा कर टालो संकट भारी
रावण पर उसकी, पर न चली

मेघनाद अक्षय अतिकाय
शूर वीर पुत्रों की वो माँ
ऐश्वर्य वैभव कदमों तले
लंका की महारानी बने
हेमा - मयदानव की पुत्री
रावण की भार्या मंदोदरी

काल के मुंह में खड़ी प्रजा
सीता को लौटा, कर लो रक्षा
रावण को बहुत समझाई
पत्नी की बात समझ न आईं
बेबस पड़ी लंका की गली
रावण की भार्या मंदोदरी

एस० डी० तिवारी

Thursday, November 17, 2016
Topic(s) of this poem: epical,hindi
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success