जो अंधकार से जन्मा क्रोध है,
जो तिरस्कार में पनपा अवरोध है,
जो अनैतिकता से उपजा विरोध है,
अपने अंदर इन सबका संघार करो,
तुम निर्भय, स्पष्ट और ज्ञानी,
ज्ञान को अपने स्वीकार करो |
जो भेद भाव की लपट से झुलस गए तुम,
जो सक्षमता में भी अक्षम बिलख रहे तुम,
जो द्वेष और क्रोध में लिपट गए तुम,
आत्मविश्वास से इनका उपचार करो,
तुम दृढ, अडिग और अद्वितीय,
आत्मसम्मान को अपने विचार करो,
तुम निर्भय स्पष्ट और ज्ञानी,
ज्ञान को अपने स्वीकार करो |
जो निम्न भावनाओं से घिर गए तुम,
जो अंधविश्वासों से मूर्छित गिर गए तुम,
जो टोंट और अफवाओं से भीड़ गए तुम,
प्रबोधन से सद्व्यवहार करो,
तुम विवेकी, धैर्यशील और सौम्य,
क्षमता को अपने स्वीकार करो,
तुम निर्भय, स्पष्ट और ज्ञानी,
ज्ञान को अपने स्वीकार करो |
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