Shudh Chetna Ka Rahasya (Hindi) Poem by Malay Roychoudhury

Shudh Chetna Ka Rahasya (Hindi)

शुद्ध चेतना का रहस्य

सब ठीक है, कूदो
एल्युमिनियम फ्रेम ग्लास की खिड़कियां बीस मंजिल से खुली हैं
हवा में झुनझुनी छिड़कें
काली ढाल एलोकेश हवा में तैरती है
औंटा पृथ्वी की रंगीन भूमि में दो पैरों पर नाचता है
तुम नीचे आओ
देखो, बाज का शरीर कितना है
आप अलॉट-फ्लिप के साथ खेलेंगे
तुम मेरे पैरों पर गिरो ​​और तुम पर गिरो
चंकी बोन पिंपल मीट स्पाइनल कॉर्ड सब सिले
नाभि नितंबों की होंठ योनि जांघ अलग होती हैं
सौंदर्य अमूर्त में परी मछली होगी
आप सभी इकट्ठा करते हैं लेकिन आप नहीं हैं
आप उस दौरान धूप में तैर रहे होते हैं
इस झुकाव को झूठ के रूप में समझें

Friday, January 31, 2020
Topic(s) of this poem: hindi
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