Saturday, December 20, 2014

जीवन की सच्चाई : (The Truth Of Life) Comments

Rating: 5.0

अरे मैं तो था उन कश्तीयों में, झूठ से भरी बस्तियों में
साथ मेरे क्या धरा था, मैं तो पूरा सच खड़ा था ॥(2) ॥

दुनिया साँची मैं ही झूठा, मुझसे ही मेरा मन था रूठा
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Mukul Kumawat
COMMENTS
Rajnish Manga 20 December 2014

कोई संवेदनशील व्यक्ति ही जीवन में मिलने वाली धूप छाँव को यथावत स्वीकार कर सकता है, बिना प्रतिरोध किये. बहुत सुंदर रचना. धन्यवाद.

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