Porshia Ban

Porshia Ban Poems

उसने कहा
इतनी क्या लकीरें पीटी
इतने क्या बहाने बनाए
सब कुछ तो गवां दिया पोर्श
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The Best Poem Of Porshia Ban

हिसाब-किताब

उसने कहा
इतनी क्या लकीरें पीटी
इतने क्या बहाने बनाए
सब कुछ तो गवां दिया पोर्श
अब क्या रहा तेरे सहारे

मैंने बोला
मैंने की ज़्यादा होशियारी
सही बैठाया सब हिसाब
जाने अनजाने खींच दिया
सबको यूं बेहिसाब

वह बोला
क्यूँ दुखाया दिल सबका
करके यूं खींच-तान
जाने देना था थोड़ा सा
गलत उनका हिसाब

मैं शरमाई
क्या करू खुदा
माफ़ी के काबिल तो नहीं
अब मेरा भी तो देखो
हिसाब-किताब काबिल नहीं

मुस्कराहट से जवाब आया
अब भी देर नहीं हुई है
ज़िद को छोड़ देने की घड़ी है
सबको माफ़ कर दे
सारे बही-खाते जला दे

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