vivek sachan

Rookie [vivek] (15-01-1992 / lucknow)

Comments about vivek sachan

There is no comment submitted by members..
Best Poem of vivek sachan

मै तेरा हूँ आज भी.....

बहुत से ख्वाब मैंने
टूटते बिखरते देखे है
इन आँखों से
तुम भी एक हिस्सा हो
उसी में से किसी एक का
न चाह कर भी ये कड़ी टूट सी गयी थी
घडी की सुइयां और रातें भी
हमसे रूठ सी गयी थी
न बदनीयत था मैं
न मेरी ऑंखें न मेरी बातें
हाँ बदहवास था मै,
मेरे जज्बात मेरा प्यार
..............
मै सही था वर्षों से तुम मेरी नही थी कभी
मै तेरा हूँ आज भी.......
बस एक नया ख्वाब फिर से
मेरी डायरी कि शोभा बडा रहा है
पुरानो कि तरह पूरा होने के इंतजार में...
..तुम्हारे इंतजार में..... विवेक सचान

Read the full of मै तेरा हूँ आज भी.....
[Report Error]