इस नए जमाने की चमक ही निराली है ।
हर गली- गली में उठती रौशनी की लाली है।।
जहाँ कभी दीपक से जगमगाते थे घरबार।
आज बस बटन दबते ही होता है उजियार।
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चल अगर चलना तुझे है,
वक्त को भी साध ले।
कस कमर तू, मुक्त भय हो,
डर को भी तू बांध ले।।
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