जिस्म की रूह, बेखयाली में ख्याल,
नींद में हो सपने, तुम गैर होके भी अपने ।
क्या हॉल तुम्हारा बयां तो करो,
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वो रातों में रोना, अपनी बात को न कहना,
प्रयास करते करते दिन का बीत जाना,
रातों में खुद को नकारा कहना,
तुझसे न हो पाएगा,
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दूरियों का सिलसिला है, मगर बातों में प्यार है,
दिल को यकीन है, तू ही मेरे पास है।
रातें तेरी यादों में कट जाती हैं हंसकर,
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फासलों में भी महसूस होता है,
तेरा पास होना,
दूरियों की इन राहों में,
खोया सा हर मौसम है,
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पहलगाम की धरती बोली, अब न कोई आँसू होंगे,
शेरों के इस वतन में बस गर्जन और बारूद होंगे।
जहाँ चले थे नापाक कदम, वहां तिरंगा लहराएगा,
हर एक शहीद का बदला अब दुश्मन को दिखलाएगा।
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पहलगाम की वादियाँ कल रो पड़ी थीं,
चुप थे चिनार और नदियाँ भी सिसक रही थीं।
जहाँ सैलानी हँसते थे, तस्वीरें बनाते,
वहीं अब बारूद की बू फैली थी रात भर।
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यूं अनंत लिखने बैठा तो सोचता क्या लिखूं?
क्या हसीना की अदावों पे लिखूं या वतन पे लिखूं,
या दिखी तस्वीर किसी भूखे बिलकते पे लिखूं
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दस बीस, साठ सत्तर से लेकर,
लाखों में बेच रहे लड़के
हाय ये कितने भूखे नंगे है
जो अपने बेटे तक को बेच रहे
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कम नही जिंदगी तू मेरे लिए,
बस दुआ है चैन मिल जाए एक घड़ी के लिए
दिल जार मेरा कोई और नही
ये मेहनत है,
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You are not less life for me,
I just pray that I get peace for a moment
There is no one else in my heart
This is hard work
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