Dinesh Kumar Gupta

Dinesh Kumar Gupta Poems

आज अनयास ही किताबों के उलट फेर में
एक पुराना खत मिला कागज के ढेर में

फिर उसने कुरेद दीं कुछ पुरानी बातें
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कुछ कहा नहीं और रुठ जाती है
कितना लड़कपन है लड़की में
फिर बिन मनाए मान जाती है
कितना पागलपन है लड़की में
...

The Best Poem Of Dinesh Kumar Gupta

एक पुराना खत मिला कागज के ढेर में

आज अनयास ही किताबों के उलट फेर में
एक पुराना खत मिला कागज के ढेर में

फिर उसने कुरेद दीं कुछ पुरानी बातें
जो दफन थी यादें वक़्त के तह फेर में

आज चलूँ एक बार फिर उसी मोड़ पर
जहां करते थे इंतेजार तुम शाम-सबेर में

चाँद लेकर आई है चाँदनी मेरे आँगन में
रोशनी नही फैली बस मेरे मन अंधेर में

जो रहता है ऐतबार अब भी उसके वादों का
कब तक मैं बंधी रहूंगी इस उम्मीदें डोर में....

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