gautam Singh


Do you like this poet?
0 person liked.
0 person did not like.


Click here to add this poet to your My Favorite Poets.


Comments about gautam Singh

---
There is no comment submitted by members..
Best Poem of gautam Singh

कविता की टिहरी /A Poem by Shirish Kumar Mourya

पेड़ से गिरे पत्ते पक्षी बनकर मंडराते हैं आकाश में
पक्षी ज़मीन पर पत्तों की तरह झड़कर गिर जाते हैं
एक डूब चुकी ज़मीन पर यह दृश्य मुझे इस तरह दिखाई देता है कि कहीं दूर कोई और भी
ऐसे ही देख रहा है इसे

अपने आसपास में डूब जाने का अवसाद मुझे इसी तरह घेरता और छोड़ता है

हर ओर पानी भरता जाता है
गांव मेरा डूब से बहुत दूर किसी और पहाड़ की धार पर है
और उधर किसी बड़ी पवित्र नदी का प्रवाह भी नहीं
गाड़-गधेरे हैं बस कुछ
और मैं किसी पवित्रता के लिए दु: खी नहीं हूं

मेरा अवसाद मुझसे बाहर है और मुझसे बड़ा है

टिहरी डूब गई
तो क्या हुआ बिजली बन रही है ...

Read the full of कविता की टिहरी /A Poem by Shirish Kumar Mourya

PoemHunter.com Updates

[Report Error]