LUCKY GAUTAM poet

Rookie - 46 Points (09-12-1993 / mathura)

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Best Poem of LUCKY GAUTAM poet

इंसानियत

"इंसान हे तू, इंसानियत का अर्थ समझ
अपने इतिहास को भूल, भविष्य की सोच
अब तो उठ, किये पापों का प्रायश्चित कर
अपने वयवहार रूपी माला मेँ इंसानियत की मोती पीरो
संत न सही इंसान तो बन

एक वक्त था, सतयुग का बोलबाला था
तूने ही अपने हाथो से पुण्य को सम्हाला था
पर आज कलयुग की मार हे
कलयुग का अन्धकार हे जिसमे लुप्त हुआ इंसान हे
आज तू हैवानियत की चादर को ओढ चूका हे
अपने बहत्तर के इंसान को तोड़ चूका हे

इंसानियत का अर्थ तू समझ जर्रूर लेना
बड़ो को आदर, छोटो को प्यार देना
अपने देश के प्रति, अपने कर्त्तव्य निभा लेना
अपने माँ बाप का क़र्ज़ चूका देना ...

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