Meera Trivedi


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Best Poem of Meera Trivedi

Chah Rakhta Hai....

ये मन बावरा मेरा ना जाने कहाँ जाने की चाह रखता है …
छल्ला है वो जो रेगिस्तान में भी डूबने की चाह रखता है …

लोग कहेते है प्यार आग का दरिया है , पर ये दीवाना उस आग में भी तैरने की चाह
रखता है ….

वाकिफ है वो इस मतलबी और खुदगर्ज दुनिया से,
फिर भी उसमे अपने सपनो की हसीन दुनिया सजानेकी चाह रखता है …
और जिंदगी के इन खुबसूरत लम्हों को अपने छोटे से दामन में समेट ने की चाह रखता है ….

एक तरफ इन समुन्दर की लहेरो से बाते करता है,
पर फिर भी उसके सैलाबों से लड़ने की चाह रखता है ...

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