Megha Bairwa Poems

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1.
Meera

मैं तो तेरी मीरा छलिए
राधा कहाँ से होऊँ।
इक मिला तेरा तन मन
मैं बस बाट जोऊँ।
...

2.
काश!

ए काश, काश तू ना होता
ना हंसा चलो पर ना रोता
भवसागर पार उसी ने किया
जो काश के पाश से बच निकला
...

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