Neelkamal Vaishnaw

Rookie (11-05-1980 / Kosir)

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Best Poem of Neelkamal Vaishnaw

Haqiqat

देखा एक ख्वाब तो
ऐसा लगा की तुम हो
मेरे बहुत करीब
इतने करीब के एक दूजे की
साँसें आपस में टकरा रही थी
पर जब अथार्थ की धरा पर
वापस आया तो अहसास हुआ
कि मैं तो बिस्तर से गिर कर
जमीन पर था पड़ा हुआ
मैं खुद पर हंसा और सोचा
कि दुनिया में तो बहुत सारे
है लोग पर क्यों कर याद
आ जाती है वह ही मुझे
जब भी याद आती है वह मुझे
हमेशा रुला सी जाती है
आज उसे भी अहसास हो रहा होगा
मुझसे दूर जाकर
वह भी बहुत दुखी हो रही होगी
मेरा प्यार न पाकर.........

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