sanjay kumar maurya

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आओ तूफानों में - Poem by sanjay kumar maurya

आओ तूफानों में नाव चलाया जाए
अपनी मकसद लहरों से बताया जाए

इन जिन्दा गलियों में खामोशी क्यों है
मन झूमे ऐसा गीत कोई सुनाया जाए

बहुत हुआ खेल लहू का भाई भाई में
अब मिलकर दूजे को गले लगाया जाए

ये धरती उगलेगी हीरे कुंदन लेकिन पहले
खेत में मेहनत के दो बूंद बहाया जाए

Topic(s) of this poem: struggle


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Poem Submitted: Tuesday, September 8, 2015

Poem Edited: Wednesday, September 9, 2015


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